Tuesday, February 26, 2013

विश्वास का प्रतीक टिटवाला का श्रीगणेश मंदिर


ठाणे जिले के  धार्मिक  स्थलों में एक  है टिटवाला। टिटवाला महागणपति की नगरी के रूप में विख्यात है। टिटवाला के  गणपति में प्राचीन काल से लोगों की  आस्था है। करीब साढ़े तीन फुट ऊंची प्रतिमा। चार भुजाएं। हाथों में परशु रुद्राक्ष माला, गदा एवं मोदक । आकर्षक  एवं मनमोहक · परिधान। यह स्वरूप है टिटवाला के सिद्धिविनाय· महागणपति का। सभी कामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। सभी क्लेश नष्ट हो जाते हैं। मन को शांति मिलती है। आस्था, श्रद्धा एवं विश्वास का प्रतीक  बन चुका है टिटवाला का श्रीगणेश मंदिर। विघ्नहर्ता के दर्शन के  लिए हमेशा भक्तों का जमावड़ा रहता है मंदिर परिसर में।
महाराष्ट्र के ठाणे जिले के कल्याण तालुका में स्थित टिटवाला का गणेश मंदिर ऐतिहासिक  एवं पौराणिक  दृष्टि से काफी महत्व रखता है। यही था कण्व ऋषि का आश्रम। दंडकारण्य के इस क्षेत्र में शकुंतला एवं दुष्यंत का विवाह हुआ था। ऐसा माना जाता है कि राजा दुष्यंत एक  बार इस क्षेत्र में शिकार करने आए थे, तब कण्व ऋषि की मानस पुत्री शकुंतला के वे स्वयं शिकार हो गए। बाद में कण्व ऋषि ने दुष्यंत एवं शकुंतला का गंधर्व विवाह कर दिया। विवाह के बाद दुष्यंत लौट गए पर वह दुर्वासा के श्राप के कारण शकुंतला को भूल गए। शकुंतला संतप्त हो गई। शकुंतला को दुखी देख·र कण्व ने विघ्नहर्ता गणेश की  पूजा-अर्चना करने को कहा। कण्व ऋषि एवं शकुंतला ने सिद्धिविनाय की  प्रतिमा बना दी और शकुंतला ने प्रथमेश की पूजा शुरू कर दी। शकुंतला गणपति की आराधना में हमेशा लगी रही। अंतत: विघ्नहर्ता ने प्रसन्न होकर दुर्वासा के शाप को विनष्ट कर दिया और शकुंतला एवं दुष्यंत का फिर मिलन हो गया। तभी से टिटवाला भक्तों की आस्था का प्रतीक  बन गया।
यह भी कहा जाता है कि नवी सदी की इसी प्रतिमा की पूजा शकुंतला ने की थी। बाद में पेशवा माधवराव के शासन काल में सूखा पड़ा, तो यहां स्थित सरोवर की खुदाई की गई। यह प्रतिमा उसी सरोवर में मिली, जिसे पेशवा सरदार रामचंद्र महेंदले ने प्राप्त किया था  और फिर प्रतिमा की प्रतिष्ठा की। तभी से यहां गणपति की पूजा-आराधना होनी लगी, जो आज तक  जारी है। वर्तमान समय में जोशी परिवार इस मंदिर की देखरेख करते हुए पूजा-अर्चना करता है।
टिटवाला का सिद्धिविनाय महागणपति भक्तों के आस्था का केंद्र बन गया है। मंदिर में अंगारिका चतुर्थी को भक्तों का जन सैलाब उमड़ पड़ता है। गणेश चतुर्थी को यहां लंबी कतारें देखने को  मिलती हैं। भक्तगण चार बजे सुबह से पहुंचना शुरू कर देते हैं और गणपति बप्पा मोर्या की हर्ष ध्वनि से वातावरण गणेशमय बन जाता है।
ऐसी धारणा भी है कि महागणपति की विश्वास से पूजा करने पर विवाह के इच्छुक  लोगों की शादी जल्द हो जाती है। पति-पत्नी के बीच द्वंद्व समाप्त हो जाता है। पुत्र की इच्छा  रखने वाले को पुत्र की प्राप्ति हो जाती है। ऐसे भगवान गणेश की पूजा करने के लिए गणेश चतुर्थी को भक्तों की भीड़ ज्यादा हो जाती है। टिटवाला के गणपति भक्तों की मनोकामना पूर्ण करते हैं ऐसा भक्तों को विश्वास है और गणपति उनके विश्वास को टूटने भी नहीं देते हैं।