कार्तिक मास में तुलसी पूजा और विष्णु आराधना फलदायी
राजमणि त्रिपाठी
कल्याण। धार्मिक दृष्टि से तुलसी का विशेष महत्वपूर्ण स्थान है। विशेषकर कार्तिक महीने में तुलसी की पूजा और तुलसी विवाह की परंपरा सदियों से चली आ रही है। कार्तिक मास शुरू हो गया है। कार्तिक मास में तुलसी पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। कहते हैं तुलसी की पूजा करने से सभी मनोकामनायें पूरी हो जाती हैं। शास्त्रों में चातुर्मास में आने वाले कार्तिक मास को धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष देने वाला माना गया है। गीता में उल्लेख मिलता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने भी कहा है कि पौधों में तुलसी ,मासों में कार्तिक , दिवसों में एकादशी और तीर्थों में द्वारिका मुझे प्रिय है।
तुलसी के जन्म के विषय में अनेक पौराणिक कथाएं मिलती हैं। इसमें जालंधर राक्षस तथा उसकी पत्नी वृंदा की कथा प्रमुख मानी गई है। पद्मपुराण में जालंधर तथा वृंदा की कथा दी गई है। बाद में वृंदा तुलसी रुप में जन्म लेकर भगवान विष्णु की प्रिय सेविका बनी। अपने सतीत्व तथा पतिव्रत धर्म के कारण ही वृंदा विष्णुप्रिया कहलाई। शालिग्राम रुप में भगवान विष्णु तुलसी जी के चरणों में रहते हैं। उनके मस्तक पर तुलसीदल चढ़ता है।
कार्तिक माह में तुलसी पूजन करने का विशेष महत्व बताया गया है। पुराणों एवं हिन्दू ग्रंथों में कहा गया है कि घर में सदैव शुभ कर्म , सदैव सुख शान्ति के लिए तुलसी की आराधना अवश्य करनी चाहिए।
कार्तिक मास में तुलसी के समीप दीपक जलाने से मनुष्य अनंत पुण्य का भागी बनता है। तुलसी की पूजा करने वाले के घर मां लक्ष्मी का हमेशा निवास होता है। तुलसी में साक्षात लक्ष्मी का निवास माना गया है। कार्तिक मास में तुलसी पूजन से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
तुलसी का प्रतिदिन दर्शन करना पापनाशक बताया गया है तथा पूजन करना मोक्षदायक। देवपूजा और श्राद्धकर्म में तुलसी आवश्यक है। तुलसी दल से पूजा करने से व्रत, यज्ञ, जप, होम, हवन करने का पुण्य प्राप्त होता है। कहते हैं भगवान श्रीकृष्ण को तुलसी अत्यंत प्रिय है। तुलसी को जल अर्पित करते समय मंत्र जाप विशेष फलदायी होता है।
महाप्रसाद जननी, सर्व सौभाग्यवर्धिनी
आधि व्याधि हरा नित्यं, तुलसी त्वं नमोस्तुते।।
बहरहाल कार्तिक मास शुरू होते ही हर घरों में तुलसी की पूजा होने के साथ ही भगवान नारायण ,गोविन्द की पूजा होने लगी है। कार्तिक मास में दोनों एकादशी का विशेष महत्व होता है। एकादशी का व्रत करने से समस्त पापों का विनाश हो जाता है लेकिन ध्यान रहे इस दिन तुलसी के पत्ते को नहीं तोड़ना चाहिए। कार्तिक मास में महिलाएं ब्रह्म मुहूर्त में ही गंगा या फिर कुएं पर स्नान करती हैं जिसे प्रात स्नान कहते हैं। स्नान के बाद ुलसी को जल अर्पित कराती हैं और भगवान विष्णु की आराधना कराती हैं। बहरहाल कार्तिक मास में विष्णु उपासना और तुलसी पूजा फलदायी और पापों का विनाश होता है।
राजमणि त्रिपाठी
कल्याण। धार्मिक दृष्टि से तुलसी का विशेष महत्वपूर्ण स्थान है। विशेषकर कार्तिक महीने में तुलसी की पूजा और तुलसी विवाह की परंपरा सदियों से चली आ रही है। कार्तिक मास शुरू हो गया है। कार्तिक मास में तुलसी पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। कहते हैं तुलसी की पूजा करने से सभी मनोकामनायें पूरी हो जाती हैं। शास्त्रों में चातुर्मास में आने वाले कार्तिक मास को धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष देने वाला माना गया है। गीता में उल्लेख मिलता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने भी कहा है कि पौधों में तुलसी ,मासों में कार्तिक , दिवसों में एकादशी और तीर्थों में द्वारिका मुझे प्रिय है।
तुलसी के जन्म के विषय में अनेक पौराणिक कथाएं मिलती हैं। इसमें जालंधर राक्षस तथा उसकी पत्नी वृंदा की कथा प्रमुख मानी गई है। पद्मपुराण में जालंधर तथा वृंदा की कथा दी गई है। बाद में वृंदा तुलसी रुप में जन्म लेकर भगवान विष्णु की प्रिय सेविका बनी। अपने सतीत्व तथा पतिव्रत धर्म के कारण ही वृंदा विष्णुप्रिया कहलाई। शालिग्राम रुप में भगवान विष्णु तुलसी जी के चरणों में रहते हैं। उनके मस्तक पर तुलसीदल चढ़ता है।
कार्तिक माह में तुलसी पूजन करने का विशेष महत्व बताया गया है। पुराणों एवं हिन्दू ग्रंथों में कहा गया है कि घर में सदैव शुभ कर्म , सदैव सुख शान्ति के लिए तुलसी की आराधना अवश्य करनी चाहिए।
कार्तिक मास में तुलसी के समीप दीपक जलाने से मनुष्य अनंत पुण्य का भागी बनता है। तुलसी की पूजा करने वाले के घर मां लक्ष्मी का हमेशा निवास होता है। तुलसी में साक्षात लक्ष्मी का निवास माना गया है। कार्तिक मास में तुलसी पूजन से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
तुलसी का प्रतिदिन दर्शन करना पापनाशक बताया गया है तथा पूजन करना मोक्षदायक। देवपूजा और श्राद्धकर्म में तुलसी आवश्यक है। तुलसी दल से पूजा करने से व्रत, यज्ञ, जप, होम, हवन करने का पुण्य प्राप्त होता है। कहते हैं भगवान श्रीकृष्ण को तुलसी अत्यंत प्रिय है। तुलसी को जल अर्पित करते समय मंत्र जाप विशेष फलदायी होता है।
महाप्रसाद जननी, सर्व सौभाग्यवर्धिनी
आधि व्याधि हरा नित्यं, तुलसी त्वं नमोस्तुते।।
बहरहाल कार्तिक मास शुरू होते ही हर घरों में तुलसी की पूजा होने के साथ ही भगवान नारायण ,गोविन्द की पूजा होने लगी है। कार्तिक मास में दोनों एकादशी का विशेष महत्व होता है। एकादशी का व्रत करने से समस्त पापों का विनाश हो जाता है लेकिन ध्यान रहे इस दिन तुलसी के पत्ते को नहीं तोड़ना चाहिए। कार्तिक मास में महिलाएं ब्रह्म मुहूर्त में ही गंगा या फिर कुएं पर स्नान करती हैं जिसे प्रात स्नान कहते हैं। स्नान के बाद ुलसी को जल अर्पित कराती हैं और भगवान विष्णु की आराधना कराती हैं। बहरहाल कार्तिक मास में विष्णु उपासना और तुलसी पूजा फलदायी और पापों का विनाश होता है।