बीती ताहि बिसार दे आगे की सुधि लेहु
नया साल कुछ लेकर आता है और पुराना वर्ष कुछ देकर जाता है। कुछ साल ऐसे भी होते हैं जो लोगों के लिए हमेशा के लिए यादगार बन जाते हैं। ये यादें खट्टी और मिठी दोनों हो सकती हैं। ऐसा ही रहा होगा कुछ लोगों के लिए 2011। कहा गया है कि बीती ताहि बिसार दे आगे की सुधि लेहु। ऐसा ही सोच कर हम सब को नए साल का स्वागत करना चाहिए। जिस तरह मेहमान के आने पर हम उसका उत्साह एवं गर्मजोशी से स्वागत करते हैं और जाने के समय उतने ही उत्साह एवं उमंग से उसकी विदाई करते हैं उसी तरह ही उत्साह एवं जोश से हम सब को जाने वाले वर्ष की विदाई और आने वाले साल का स्वागत करना चाहिए। फिलहाल नए वर्ष की अगवानी हमने उत्साह से किया।सबको न या साल मंगलमय हो यही हमारी शुभकामना। रामचरित मानस में गोस्वामी ने लिखा है—
सुनहु भरत भावी प्रबल विलखि कहेउ मुनिनाथ
हानि, लाभ, जीवन, मरण, यश अपयश विधि हाथ
लोगों की ऐसी धारणा उन्हें एवं उनके परिवार को धर्म के प्रति आस्थावान बनाती है।उनका यही मानना है कि जन कल्याण की भावना से किया गया कार्य सदैव सराहनीय एवं अच्छा होता है। हम नए साल में नए विचारों एवं नए जोश से आगे बढ़ें। ऐसा सोच कर हम अप ने संकल्प को आगे बढ़ाये निश्चित रू प से सफलता मिलेगी।
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